दिशा&छाया न्यूज़ को आवश्यकता है मुज़फ्फरनगर, सहारनपुर, शामली ओर उत्तर प्रदेश में से तहसील, जिला स्तर,कस्बो,गांव में से रिपोर्टर,ओर कैमरामैन, एंकर, के लिए इछुक लड़के और लड़कियां हमे तुरन्त संपर्क करे :-09891980535, 09690142222, 08868991239

GST डे’ पर आज जश्न मनाएगी मोदी सरकार, कारोबारी दुकान बंद कर जताएंगे विरोध

Spread the love

नई दिल्ली: वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लागू हुए रविवार को एक साल पूरे होने जा रहे हैं। केन्द्र की मोदी सरकार इसे अप्रत्यक्ष कर के क्षेत्र में एेतिहासिक सुधार बताकर जीएसटी की पहली बरसी यानी 1 जुलाई को जीएसटी डे के रूप में मनाने की तैयारी की है।

वहीं, व्यापारी अब भी जीएसटी की खामियों से त्रस्त है। व्यापारियों का आरोप है कि जीएसटी का कॉन्सेप्ट तो ठीक था। लेकिन इस सरकार ने इसे सही तरीके से इंप्लीमेंट नहीं किया, जिससे व्यापारियों और ट्रेडरों को इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है।

दरअसल, सत्ता में आने के साथ हमेशा से चर्चा में रहने वाली मोदी सरकार एक जुलाई 2017 को पूरे देश में जीएसटी लागू कर चर्चा का केंद्र बन गई थी। एक साल में इसने भारतीय कराधान क्षेत्र में अप्रत्याशित सुधारों के प्रति करदाताओं के उत्साह और भागीदारी का पूरी दुनिया में एक बेहतर उदाहरण प्रस्तुत किया है।
वित्त मंत्रालय ने बताया कि सरकार एक जुलाई 2018 को ‘जीएसटी दिवस’ मनायेगी। संसद के केन्द्रीय कक्ष में 30 जून और एक जुलाई 2017 की मध्यरात्रि को पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की उपस्थिति में जीएसटी को देश में लागू किया गया था।
इस मौके पर दिल्ली के जनपथ स्थित डॉक्टर अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में सुबह 11 बजे जीएसटी की सफलता का जश्न मनाया जाएगा. वित्त मंत्रालय के अनुसार, ‘केन्द्रीय रेल, कोयला, वित्त एवं कारपोरेट कार्य मंत्री पीयूष गोयल इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होंगे जबकि वित्त राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ला भी इस अवसर पर उपस्थित होंगे.’ केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली इस दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए लोगों को संबोधित करेंगे।
जीएसटी में करीब एक दर्जन करों को समाहित किया गया है। केन्द्र स्तर पर लगने वाले उत्पाद शुल्क, राज्यों में लगने वाले मूल्य वर्धित कर (वैट) और कई स्थानीय शुल्कों को जीएसटी में समाहित किया गया। जिसके बाद देश में ‘एक राष्ट्र, एक कर’ की यह नई प्रणाली लागू हुई।
मंत्रालय ने इस अवसर पर कहा है, ‘जीएसटी का पहला साल भारतीय करदाताओं के इस अप्रत्याशित कर सुधार की व्यवसथा में भागीदार बनने को लेकर तैयार रहने का बेहतर उदाहरण दिखाता है।’ इसमें कहा गया है कि इलेक्ट्रानिक वे-बिल इस प्रणाली के तहत पहले के विभागीय नीतिगत मॉडल से आगे बढ़कर एक ‘स्व-घोषित मॉडल’ की दिशा में अहम बदलाव है। इसमें ई-वे बिल हासिल कर पूरे देश में माल की बिना किसी रोक टोक के बाधामुक्त आवाजाही सुनिश्चित हो सकती है। देश में अंतरराज्यीय ई-वे बिल व्यवस्था एक अप्रैल 2018 से लागू हुई है जबकि राज्यों के भीतर माल परिवहन के लिये ई-वे बिल लेने की व्यवस्था को 15 अप्रैल से चरणों में लागू किया गया।


Spread the love