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‘पकौड़ा रोजगार योजना’ पर क्यों हो रही है राजनीति गर्म?

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नई दिल्ली: रोजगार के मुद्दे पर चौतरफा आलोचना झेल रही मोदी सरकार अब अपने विरोधियों से बचने का रास्ता तलाश रही है. इसके लिए बीजेपी नेता और सांसद अजीब-अजीब तरह की तर्क दे रहे हैं. आलम ये है कि अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और सरकार के लोग पकौड़ा बेचने को भी रोजगार मानने लगे हैं.

 

बीजेपी अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद अमित शाह ने राज्यसभा में अपने पहले भाषण में कहा कि बेरोजगारी से अच्छा है कि युवा मेहनत कर पकौड़े बेचें. बता दें कि इससे पहले एक चैनल के इंटरव्यू में प्रधानमंत्री मोदी भी कह चुके हैं कि पकौड़े बेचना भी रोजगार है.

 

इस मुद्दे को लेकर इस समय राजनीति गर्म है. मोदी द्वारा पकौड़ा बेचने को भी रोजगार बताने पर पर कांग्रेस नेता और पूर्व वित्त पी चिदंबरम ने लिखा था, “अगर पकौड़ा बेचना नौकरी है तो भीख मांगने को भी रोजगार के तौर पर देखना चाहिए.”

 

कांग्रेस बीजेपी को लगातार रोजगार के मुद्दे पर घेर रही है. हालांकि बीजेपी भी अपने विरोधियों को जवाब देने की कोशिश कर रही है. अमित शाह ने राज्यसभा में कहा, “मैं मानता हूं बेरोजगारी की समस्या है मगर 55 साल से कांग्रेस शासन के बाद ये हाल है तो कौन जिम्मेदार है.”

 

बता दें कि नरेन्द्र मोदी ने 2014 के लोकसभा चुनाव के वक्त हर साल 1 करोड़ रोजगार देने का वादा किया था. लेकिन सत्ता में आने के बाद वास्तविकता कुछ और ही है. अगर सिर्फ 2017 की बात करें तो सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी की रिपोर्ट के मुताबिक 2017 में सिर्फ 20 लाख नौकरियां मिलीं.

 

हालांकि सरकार एक रिपोर्ट के हवाले से यह दावा कर रही है कि 2017 में 70 लाख नौकरियां मिली. बेरोजगारी के मुद्दे को लेकर देशभर में कई जगह विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.


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